Bookmark and Share

rahat-indori

डॉ. राहत इंदौरी को वीजा न देकर यूएसए ने अपनी बेइज्जती करा ली है। 45 से अधिक देशों में राहत इंदौरी का नाम बड़े अदब से लिया जाता है। वे एक ऐसी शख्सियत हैं, जो भारत के सांस्कृतिक राजदूत की हैसियत रखते हैं। यूएसए ने वीजा न देकर अपनी प्रतिष्ठा खुद कम कर ली है। ऐसा भी नहीं है कि डॉ. राहत इंदौरी पहली बार यूएसए जाने की इच्छा रखते हो। वे इसके पहले 11 बार यूएसए जा चुके है और करीब 100 से अधिक मुशायरों में अपनी रचनाएं पढ़ चुके हैं। यूएसए को डर है कि कहीं राहत इंदौरी यूएसए में ही न रह जाएं। यह अहमकपन की पराकाष्ठा है। अगर डॉ. राहत इंदौरी यूएसए जाकर बस भी जाएं, तो उन्हें इस बात का सौभाग्य मानना चाहिए। यह बात और है कि वे भारत छोड़कर कहीं और जा बसने वाले नहीं हैं।

डॉ. राहत इंदौरी को पूरी दुनिया शायर के तौर पर ही जानती है। कई लोग उन्हें फिल्मी गीतकार के रूप में भी मानते हैं। यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि वह मूलत: चित्रकार है और मकबूल फिदा हुसैन की तरह उन्होंने भी अपने गर्दिश के दिनों में सिनेमा के होर्डिंग्स की चित्रकारी की है। इंदौर में बंद हो चुके मिल्की वे टॉकीज के पास उनका अपना कथित स्टुडियो हुआ करता था। यह जगह इंदौर के रीगह तिराहे के करीब है। दिलचस्प बात यह है कि सिनेमा के होर्डिंग्स बनाने वाले मकबूल फिदा हुसैन ने फिल्मों का निर्माण किया और राहत इंदौरी ने फिल्मों में गाने लिखे। यह भी दिलचस्प बात है कि मकबूल फिदा हुसैन की फिल्म मीनाक्षी में राहत इंदौरी ने गाने लिखे थे। दोनों मूलत: इंदौर के ही है और यह इंदौर के लिए फक्र की बात हैं। राहत इंदौरी ने पचास से अधिक फिल्मों में गाने लिखे। जिनमें मिशन कश्मीर, मुन्ना भाई एमबीबीएस, इश्क, हमेशा, नाराज, इंतेहा और जुर्म जैसी फिल्में प्रमुख है।

राहत इंदौरी ने अपनी पूरी पढ़ाई उर्दू माध्यम से की। बाद में वे इंदौर विश्वविद्यालय से जुड़े इस्लामिया करीमिया कॉलेज में उर्दू पढ़ाने लगे। उर्दू में ही उन्होंने भोज मुक्त विश्वविद्यालय से पीएचडी भी की। बचपन से ही वे उर्दू शायरी की किताबें पढ़ते रहते थे। दूसरे शायरों के अनेक शेर उन्हें याद थे। दोस्तों की महफिल में जब लोग उनसे शेरों-शायरी सुनाने की गुजारिश करते तो वे मशहूर शायरों के साथ-साथ अपने लिखे शेर भी सुना देते। बरसों तक लोगों को यह पता ही नहीं था कि यह शेर उन्होंने खुद लिखे है। जब धीरे-धीरे लोगों को इस बात का एहसास हुआ कि जो शेर वे सुन रहे है, उसके लिखने वाले राहत इंदौरी खुद है, तब लोगों में उनकी छवि पेंटर से शायर की हो गई। छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने मुशायरों में जाना शुरू कर दिया था, लेकिन पहली बार उन्होंने देवास के एक मंच से अपनी शायरी लोगों को सुनाई। कुछ ही साल में वे देशभर में एक मशहूर शायर के रूप में सम्मान के पात्र बने।

राहत इंदौरी जितने भारत में मशहूर है, उतने ही पाकिस्तान में भी है। 1986 में वे पहली बार पाकिस्तान में एक मुशायरे में भाग लेने गए। मंच पर वे सबसे युवा शायर थे। उनके साथ महेन्द्र सिंह बेदी, फजा निजामी, प्रो. जगन्नाथ आजाद, सरदार कौर जैसे मशहूर शायर मंच पर थे। करीब 20 हजार श्रोताओं के सामने यह मुशायरा संपन्न हुआ। राहत इंदौरी का मानना है कि शायरी को सुनने और शायरी से मोहब्बत करने वाले पूरी दुनिया में एक जैसे लोग ही है। चाहे वे आजमगढ़ के श्रोता हो या लखनऊ के, हैदराबाद के या न्यू यॉर्क के, नारवे के हो या पाकिस्तान के। अच्छी शायरी सभी को पसंद आती है।

मंच पर लोकप्रियता पाने के बाद उन्हें फिल्मों में गाने लिखने का प्रस्ताव भी मिला। अपनी व्यस्तता के चलते उन्होंने अध्यापन कार्य छोड़ दिया। कुछ साल मुंबई में रहकर फिल्मों के लिए लेखन किया, लेकिन मुंबई रास नहीं आई, तो वापस इंदौर आ गए। आजकल उनके बेटे सतलज उनके नक्शे कदम पर चल रहे है।

20 April 2016

rahat     

वीडियो देखिये : 

डॉ राहत इंदौरी से

प्रकाश हिन्दुस्तानी की बातचीत 

https://www.youtube.com/watch?v=fSMdNQjyBIs

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com