Bookmark and Share

6-Feb-2011

तानाशाह बुरा, केवल बुरा ही होता है. छवि चमकाने के लिए वह अकसर अच्छे काम का दिलासा देता है. वह कुछ भी कर ले, सबसे बुरा तो वह खुद ही होता है. मिस्र में हुस्नी मुबारक ने तीन दशकों तक जनता की छाती पर मूंग दले हैं, जिसे जनता माफ़ नहीं कर सकती. उन्होंने भले ही महंगाई पर काबू किया हो; बेरोजगारी पर लगाम लगाई हो; लोगों को सस्ते घर, दवा, कपड़े, फर्नीचर दिलाया हो; भ्रष्टाचार से थोड़ी राहत दिलाई हो; अर्थ व्यवस्था को थोड़ा सुधार हो; पुराने तानाशाह के मुकाबले वे भले ही थोड़े नरम हों; पर वे हैं तो तानाशाह ही और तानाशाह कभी भी भला तो हो ही नहीं सकता. मुबारक ने करोड़ों पुण्य किये हों, पर उनका तानाशाही का पाप क्षमायोग्य नहीं. इतिहास में वे कूड़े की वस्तु हैं.

मुबारक अपने विरोधियों के प्रदर्शन के आगे अगर बहुत हिंसक नहीं हुए तो यह उनकी मजबूरी ही रही. उनका बस चलता तो दूसरे तानाशाहों की तरह विरोध करनेवालों को नेत्सनाबूत कर देते. उन्होंने इसकी कोशिश भी की, मीडिया को कुचला, इलेक्ट्रानिक माध्यमों पर दबाव की नीति अपनाई, पर यह सब कारगर नहीं हो सका. हवा का रुख जानते हुए उन्होंने वादे किये कि वे भ्रष्ट लोगों को हटा रहे हैं, यह भी कहा कि वे जल्दी चुनाव कराएँगे और खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे. फिर चुपचाप उन्होंने अपने बेटे को विदेश रवाना करवा दिया, जिसे वे अपना उत्तराधिकारी बनने की कवायद कर चुके थे. अमेरिका का रुख भी उन्होंने समझा और अपनी बरबादी का रास्ता मोड़ने की कोशिश की जो नाकाम रही.

दूसरे तानाशाहों की ही तरह मुबारक अच्छे फौजी रहे हैं. उन्होंने फ़ौज की स्थिति का हमेशा फायदा उठाया, लेकिन आख़िरी समय में फ़ौज ने भी उनका साथ छोड़ दिया और निहत्थी भीड़ पर हमला नहीं किया. ऐसे में उन्होंने पुलिस की मदद ली और अपने तथाकथित समर्थकों से गुंडागर्दी कराई, जो बहुत कारगर नहीं हुई. मुबारक जानते हैं कि खेती और स्वेज नहर की आय के बाद भी मिस्र को अमेरिकी मदद की दरकार रहती है और फिर भी गरीबी, बेरोज़गारी पिछड़ापन बरकरार है. पद से हटने की मांग नहीं मानते हुए वे बस यही कहते रहे हैं कि अगला चुनाव वे नहीं लड़ेंगे. उन्हें पता है कि मिस्र में उनकी पार्टी 'किसी भी कारण से' वापस सत्ता में आ सकती है. बीते नवम्बर में वहां के संसदीय चुनाव में उनकी पार्टी 90 प्रतिशत सीटों पर कब्ज़ा जमा चुकी है और विरोधी इस्लामिक ग्रुप के नेता सभी 88 सीट हर चुके हैं. अब उनका लक्ष्य अपने बेटे को राष्ट्रपति बनाना है.

मुबारक हायर सेकंडरी के बाद ही सेना में भर्ती हो गए थे. उनकी ग्रेजुएशन की डिग्री मिलिट्री साइंस में है और वे २५ साल तक एयर फ़ोर्स में रहे हैं. मिस्र की एयर फ़ोर्स को नया रूप देने में उनका योगदान रहा है, जिसे इस्राईल ने तबाह कर दिया था. उन्होंने खुद कई युद्धों में हिस्सा लिया था और दुश्मनों पर हवाई हमले किये थे. ईस्ट बैंक पर हमला कर वापस कब्ज़ा लेने में उनकी भूमिका रही. यमन में भी उन्होंने बमवर्षक उडाये थे.

14 मई 1928 को जन्मे मुबारक राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या के बाद 14 अक्टूबर 1981 से मिस्र के राष्ट्रपति हैं. वास्तव में १९७५ में उपराष्ट्रपति बनने के बाद ही वे असली सत्ता में हैं क्योंकि रंगीनमिजाज़ सादात ने उन्हें तमाम ऐसे काम सौंप रखे थे जिनमें उन की दिलचस्पी नहीं थे. उपराष्ट्रपति रहते हुए मुबारक संसद की बैठकें किया करते थे, सेना को निर्देश देते थे और विदेश मामलों में टांग अड़ाए रखते थे. वे अरबी के साथ ही अंग्रेज़ी और रूसी भाषा भी जानते हैं और केम्प डेविड समझौते में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी. वे जो भी हों, अब महज कूड़ेदान के लायक बचे हैं.

प्रकाश हिन्दुस्तानी

06.02.2011)

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com